Wednesday 14 February 2007

सैंतीस रूपये का चूना

किसी से खबर मिली थी कि भारत सरकार का संगणक विभाग भारतीय भाषाओं के विस्तार के लिये हिन्दी (व अन्य भाषाओं) में सोफ्टवेयर की सी.डी. भेज रहा है। शौक मैं भी उनके जालस्थल पर पहुँच गया और जबकि मैं उन सोफ्टवेयरों को डाऊनलोड भी कर सकता था फिर भी एक सी.डी. का अनुरोध कर दिया। पता अमरीका वाला डाला और...फिर बात भूल गया। किसने सोचा था कि सरकारी दफ्तर से कुछ मँगाओ तो मिल भी जायेगा वो भी सात समुंदर पार। महीनों के बाद एक दिन सी.डी. यहाँ पहुँच ही गई। वाह जी, बड़ा आश्‍चर्य हुआ। फिर जब डाक टिकट की कीमत देखी तो पहला विचार यही आया कि सरकारी सैंतीस रूपये बिगड़वा दिये मैने!


किसने सोचा था कि सरकारी दफ्तर से कुछ मँगाओ तो मिल भी जायेगा वो भी सात समुंदर पार।

खैर कभी उस सी.डी. के सोफ्टवेयरों का ऊपयोग करूँगा तो, शायद जब अपने घर पर कंप्यूटर लाऊँ माता-पिता के लिये। मेरे लिये तो बरहा ही पर्याप्त है अभी। फिर भी जिन लोगों को मँगाना हो वो कोशिश कर सकते हैं - अगर यहाँ भेज सकते हैं तो निश्चित ही कहीं भी भेज सकते होगें। सी.डी. में हिन्दीभाषी फॉन्ट और कुंजीपटल ड्राईवर्स, ऑफिस (भारतीय), ब्राऊज़र (फायरफॉक्स), आई. एम. (गेम) व ई-मेल सोफ्टवेयर (कोलंबा), शब्दकोष, स्पैल-चैकर, टाईपिंग सिखाने का व लेख से आवाज़ बदलने वाला सोफ्टवेयर इत्यादि हैं।

3 प्रतिक्रिया(ऐं):

Shrish said...

मेरे साथ भी यही हुआ था। रजिस्टर कर भूल ही गया था कि महीनों बाद एक दिन वो सीडी पहुँची। उसमें अधिकतर सॉफ्टवेयर तो आउटडेटेड हैं, पर कुछ चीजें काम की हैं।

संजय बेंगाणी said...

यह सी.डी. हमारे पास काफी समय से है, मगर उपयोग करने योग्य कितने सोफ्टवेर है, यह तो जब आप उपयोग करेंगे आपको पता चल जाएगा.
जनता का पैसा पानी में डाला है.

Sagar Chand Nahar said...

यह सीडी मेरे पास भी है और इससे बकवास चीज नही देखी, कहते हैं कि दान की बछिया के दाँत नहीं गिने जाते पर आखिर पैसा तो जनता का ही बिगड़ा है इस सोफ्तवेर को बनाने और वितरण के पीछे, जब कॊई चीज इसमें काम की ही नहीं है फिर क्यों इतना समय और पैसा बर्बाद किया गया।
लगता है सोनिया जी का महिमामंडन करने के उद्देश्य से इसको वितरित किया है।
॥दस्तक॥