Friday 6 April 2007

हम करें राष्ट्र आराधन


हम करें राष्ट्र आराधन...आराधन ॥२॥

तन से मन से धन से
तन मन धन जीवन से
हम करें राष्ट्र आराधन...आराधन
अंतर से मुख से कृति से
निश्‍छल हो निर्मल मति से
श्रद्धा से मस्तक नत से
हम करें राष्ट्र अभिवादन...अभिवादन

हम करें राष्ट्र आराधन - ४
तन से मन से धन से
तन मन धन जीवन से
हम करें राष्ट्र आराधन - ३
आराधन...करें राष्ट्र आराधन

अंतर से मुख से कृति से
निश्‍छल हो निर्मल मति से ॥२॥
श्रद्धा से मस्तक नत से
हम करें राष्ट्र अभिवादन - २
हम करें राष्ट्र आराधन - २
आराधन...हम करें राष्ट्र आराधन

अपने हँसते शैशव से
अपने खिलते यौवन से ॥२॥
प्रौढ़ता पूर्ण जीवन से
हम करें राष्ट्र का अर्चन - २
हम करें राष्ट्र आराधन - २
आराधन...हम करें राष्ट्र आराधन

अपने अतीत को पढ़कर
अपना इतिहास उलटकर ॥२॥
अपना भवितव्य समझकर
हम करें राष्ट्र का चिंतन - २
हम करें राष्ट्र आराधन - २
आराधन...हम करें राष्ट्र आराधन

है याद हमे युग-युग की
जलती अनेक घटनाऐं
जो माँ की सेवा पथ पर
आई बनकर विपदाऐं
हमनें अभिषेक किया था
जननी का अरि शोणित से
हमने शृंगार किया था
माता का अरिमुंडो से
हमने ही उसे दिया था
सांस्‍कृतिक ऊच्च सिंहांसन
माँ जिस पर बैठी सुख से
करती थी जग का शासन
अब काल-चक्र की गति से
वह टूट गया सिंहांसन
अपना तन मन धन देकर
हम करें राष्ट्र आराधन - ४
तन से मन से धन से
तन मन धन जीवन से
हम करें राष्ट्र आराधन - ३
आराधन...हम करें राष्ट्र आराधन
हम करें राष्ट्र आराधन - ३

Hum Kare Rashtra A...


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6 प्रतिक्रिया(ऐं):

Raman Kaul said...

यह देशभक्ति गीत उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद। कृपया निम्नलिखित त्रुटियाँ सुधार लें और चाहें तो यह टिप्पणी मिटा दें।

निश्‍चल > निश्‍छल
हँस्ते > हँसते
योवन > यौवन
प्रोढ़ता > प्रौढ़ता
भवतव्य > भवितव्य
जननि > जननी
हरि शोणित > अरि-शोणित
श्रिंगार > शृंगार
हरि मुंडो > अरिमुंडों

पहला पैरा दोहराया गया है।

धन्यवाद

Vivek Rastogi said...

धन्यवाद हम करें राष्ट्र आराधन...आराधन गीत के लिये अपने पढ़ाई के जमाने के बाद आज यह गीत देखने को मिला व यह मेरा मनपसंद गीत है|

Shuaib said...

बहुत ज़माना बाद ये राष्ट्र गीत पढा अच्छा लगा - धन्यवाद

Ashish Gupta said...

धन्यवाद रमन कौल जी। गलतियाँ सुधार ली गई हैं।

Nishikant Tiwari said...

दिल की कलम से
नाम आसमान पर लिख देंगे कसम से
गिराएंगे मिलकर बिजलियाँ
लिख लेख कविता कहानियाँ
हिन्दी छा जाए ऐसे
दुनियावाले दबालें दाँतो तले उगलियाँ ।
NishikantWorld

Kiran said...

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