Saturday 14 August 2010

क्षमा निवेदन

यह चिट्ठा पिछले एक वर्ष से नगण्य हैं और मैं कह नही सकता कि यह फिर से कब पुनः शुरू हो सकेगा। अतः जो पाठक गाहे-बगाहे यहाँ आ भटके हों उनसे क्षमा प्रार्थी हूँ।

2 प्रतिक्रिया(ऐं):

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप आज आए तो।

आजाद है भारत,
आजादी के पर्व की शुभकामनाएँ।
पर आजाद नहीं
जन भारत के,
फिर से छेड़ें, संग्राम एक
जन-जन की आजादी लाएँ।

Udan Tashtari said...

आईये, इन्तजार करते हैं.

स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.