क्षमा निवेदन
यह चिट्ठा पिछले एक वर्ष से नगण्य हैं और मैं कह नही सकता कि यह फिर से कब पुनः शुरू हो सकेगा। अतः जो पाठक गाहे-बगाहे यहाँ आ भटके हों उनसे क्षमा प्रार्थी हूँ।
यहीं कहीं की बातें - जीवन की किताब की कतरनें
यह चिट्ठा पिछले एक वर्ष से नगण्य हैं और मैं कह नही सकता कि यह फिर से कब पुनः शुरू हो सकेगा। अतः जो पाठक गाहे-बगाहे यहाँ आ भटके हों उनसे क्षमा प्रार्थी हूँ।
2 प्रतिक्रिया(ऐं):
आप आज आए तो।
आजाद है भारत,
आजादी के पर्व की शुभकामनाएँ।
पर आजाद नहीं
जन भारत के,
फिर से छेड़ें, संग्राम एक
जन-जन की आजादी लाएँ।
आईये, इन्तजार करते हैं.
स्वतंत्रता दिवस की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.
Post a Comment