Saturday 14 February 2009

ऐ माँ तेरी सूरत से अलग


उसको नहीं देखा हमने कभी
पर इसकी ज़रूरत क्या होगी?
ऐ माँ! ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी? क्या होगी?
उसको नहीं देखा हमने कभी

इंसान तो क्या देवता भी
आँचल में पले तेरे
है स्वर्ग इसी दुनिया में
कदमों के तले तेरे
ममता ही लुटाऐ जिसके नयन ।२।
ऐसी कोई मूरत क्या होगी?
ऐ माँ! ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी? क्या होगी?
उसको नहीं देखा हमने कभी

क्यों धूप जलाऐ दुःखों की
क्यों ग़म की घटा बरसे
ये हाथ दुआओं वाले
रहते हैं सदा सर पे
तू है तो अंधेरे पथ में हमें ।२।
सूरज की ज़रूरत क्या होगी?
ऐ माँ! ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी? क्या होगी?
उसको नही देखा हमने कभी

कहते हैं तेरी शान में जो
कोई ऊँचे बोल नहीं
भगवान के पास भी माता
तेरे प्यार का मोल नहीं
हम तो यही जानें तुझ से बड़ी ।२।
संसार की दौलत क्या होगी?
ऐ माँ! ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी? क्या होगी?
उसको नही देखा हमने कभी
पर इसकी ज़रूरत क्या होगी?
ऐ माँ! ऐ माँ तेरी सूरत से अलग
भगवान की सूरत क्या होगी? क्या होगी?
उसको नही देखा हमने कभी


1 प्रतिक्रिया(ऐं):

seema gupta said...

क्यों धूप जलाऐ दुःखों की
क्यों ग़म की घटा बरसे
ये हाथ दुआओं वाले
रहते हैं सदा सर पे
" बहुत बहुत आभार इस गीत को यहाँ प्रस्तुत करने को , मन्त्र मुग्ध कर दिया...आज के दिन माँ के प्रति प्यार और सम्मान का इससे बढ़ कर क्या तरीका हो सकता है..की हम इन शब्दों को याद कर दोहराएँ "
Regards